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खुले में घूमने वाले पशुओं को गौठान में भेजने के लिए पशु पालकों को किया जा रहा प्रेरित

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शासन द्वारा फसलों की मवेशियों से सुरक्षा से उद्देश्य से रोका-छेका अभियान चालू किया गया है। रोका-छेका छत्तीसगढ़ की पुरनी परंपरा है इसके जरिए फसलों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण इस बात की संकल्प लेते है कि खरीफ फसल के दौरान अपने मवेशियों को बाड़े और गौठन में रखेंगे।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कवर्धा ने बताया कि प्रायः यह देखा गया है कि ग्राम पंचायत तथा आश्रित ग्रामों और शहरों के पशुपालकों द्वारा अपने घर में न रखकर खुले में छोड़ दिया जाता है जिससे खुले में रह रहे पशुओं का जमावड़ा सड़क पर बना रहता है। इससे सड़क यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी अधिक होता जाता है। शासन के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत तथा आश्रित ग्रामों में खुले में घूमने वाले पशुओं को गौठान में भेजने के लिए पशु पालकों को प्रेरित कर पशुओं को गौठान में लाने सुनिश्चित करने की पहल की जा रही है। जिससे सड़क यातायात तथा सड़क में होन वाली दुर्घटना से बचा जा सके।