Home छत्तीसगढ़ जनजातीय विकास को सांसद संकुल विकास परियोजना से मिलेगी गति- मुख्यमंत्री श्री...

जनजातीय विकास को सांसद संकुल विकास परियोजना से मिलेगी गति- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

45
0
SAVE_20260918_191029
SAVE_20260918_191016
SAVE_20260918_191024
SAVE_20260925_190202
SAVE_20260925_190208

रायपुर.

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सांसद संकुल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय विकास को सांसद संकुल विकास परियोजना से गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने महत्वपूर्ण पहल की जा रही है, इससे जनजातीय क्षेत्रों से पलायन पर रोक लगेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने लगातार प्रयास किया जा रहा है। सांसद संकुल विकास परियोजना के तहत गांवों के क्लस्टर बना कर विकास का मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ लोगों को मिल रहा है। स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग द्वारा लोगों का कौशल विकास कर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना ही योजना का उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है। हमारे यहां धान की कई किस्में हैं जिनके निर्यात की बड़ी संभावना है। कृषि के साथ ही मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन, शूकर पालन से ग्रामीणों को जोड़ कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। हमारे जनजातीय लोग महुआ, इमली, चिरौंजी आदि वनोपज का पुश्तैनी रूप से उत्पादन करते आ रहे हैं, इनका वैल्यू एडिशन कर मार्केट से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य की नई उद्योग नीति में भी अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना से जुड़े जनप्रतिनिधि और विकास सहयोगी सुनिश्चित करें कि जनजातीय क्षेत्रों में नई उद्योग नीति के लाभ भी मिलें। सांसद संकुल विकास परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की जाएगी।

बैठक में श्री वी सतीश ने सांसद संकुल विकास परियोजना की परिकल्पना और लक्ष्य से जुड़े बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार से जोड़कर पलायन रोकने की दिशा में योजना के तहत महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इस योजना के तहत गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे जनजातीय बहुल राज्यों में आमजन, एनजीओ, जनप्रतिनिधि और सरकार के समन्वित प्रयास से समग्र विकास किया जा रहा है।

कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि विभिन्न विभागों से जुड़े शासकीय अधिकारी भी संकुल से जुड़े गांवों के विकास में अपनी भूमिका का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें। स्थानीय जरूरतों की बेहतर समझ से कौशल विकास कर लोगों को स्थाई रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।

बैठक में रायगढ़ के लैलूंगा संकुल, सरगुजा के परशुरामपुर संकुल, बस्तर के बकावंड संकुल, बलरामपुर के माता राजमोहिनी देवी संकुल और केशकाल के धनोरा संकुल में योजना के तहत किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग, श्री चिंतामणि महाराज, श्री राधेश्याम राठिया, श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, श्रीमती गोमती साय, श्री प्रसाद इंडेप, श्री कपिल सहस्त्रबुद्धे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व गणमान्यजन उपस्थित थे।