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अम्बेडकर अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की सेवा भावना ने बचायी दो मरीजों की जान

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एंडोट्रैकियल ट्यूब की मदद से इंटुबैशन कर मरीजों को किया ठीक 

रायपुर. 13 मई 2021 कोरोना की दूसरी लहर से निर्मित बेहद ही विषम परिस्थितियों के बीच भी स्वास्थ्यकर्मी अपनी सेवा भावना और कर्तव्यपरायणता की नई-नई मिसाल पेश कर रहे हैं। कुछ इसी तरह की मिसाल पेश की है डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल विभाग के जूनियर डॉक्टरों की टीम ने। जूनियर डॉक्टरों की टीम ने । बेहद ही गंभीर स्थिति में भर्ती दो मरीजों को अपनी सेवाभावना की बदौलत एंडोट्रैकियल ट्यूब यानी कृत्रिम श्वांस नली लगाकर जल्दी ठीक होने में मदद की। दोनों मरीज के फेफड़े में संक्रमण अधिक होने के कारण इनका इंटुबैशन किया गया और ट्यूब के सहारे कृत्रिम सांस (वेंटिलेटर से) दी गई जिससे दोनों मरीज, जिन्हें सांस लेने में बेहद कठिनाई हो रही थी, उनके फेफड़ों की रक्षा हो सकी। उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन वापस मानक स्तर पर आ गया। अभी दोनों मरीज आईसीयू 4 में भर्ती हैं और जल्द ही डिस्चार्ज होने वाले हैं। एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग की डॉक्टर लिली शेरोन, डॉ. तारेन्द्र देवांगन, डॉ. मुकेश नाग, डॉ. सुषमा, डॉ. अंकिता, डॉ. त्रिलोक, डॉ. दिव्यानंद, डॉ. शीतल दास और डॉ. मनीष कुर्रे की टीम ने लगातार कई दिनों तक सिमगा, बलौदाबाजार निवासी 28 वर्षीय जंतु मांझी और कवर्धा की 42 वर्षीय सुदामा बाई का इलाज एवं देखरेख किया। इन दोनों मरीजों को कोरोना के साथ-साथ सिग्माइड वॉल्वुलस(आंत अवरोध की बीमारी) की समस्या थी। मरीजों का ऑक्सीजन सैचुरेशन भी बहुत कम था। इनका ऑपरेशन हुआ लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण दोनों मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी, इनके फेफड़ों की रक्षा के लिये गले में ट्यूब (इंटुबैशन) की मदद से कृत्रिम सांस दी गई जिससे जल्दी दोनों रिकवर हो सकें। अम्बेडकर अस्पताल के कोविड क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. ओ. पी. सुंदरानी के मुताबिक वेंटिलेटर में मरीजों का एनआईवी सपोर्ट से रिकवरी हो जाती है, लेकिन इंटुबैशन (गले में ट्यूब डालना) के बाद कोविड मरीजों का एक्सटुबैशन (ट्यूब निकालना) बहुत मुश्किल होता है, पर दोनों मरीज एक्सटुबैट हुए। हालांकि यह बेहद जटिल प्रक्रिया थी लेकिन जूनियर डॉक्टरों के अथक परिश्रम और सेवा की बदौलत कुछ दिनों बाद ये दोनों मरीज डिस्चार्ज हो जाएंगे।क्या है एंडोट्रैकियल इंटुबैशन (ईआई)एंडोट्रैकियल इंटुबैशन (ईआई) अक्सर एक आपातकालीन प्रक्रिया होती है जो ऐसे लोगों पर की जाती है जो बेहोश हैं या जो अपने दम पर सांस नहीं ले सकते हैं। एंडोट्रैकियल इंटुबैशन एक खुला वायुमार्ग बनाता है और घुटन को रोकने में मदद करता है। यह प्रक्रिया बेहद ही सावधानीपूर्वक मरीज को बेहोश करके किया जाता है। इसमें एक लचीली प्लास्टिक ट्यूब होती है जो सांस लेने में मदद करने के लिए मुंह के माध्यम से श्वासनली में रखा जाता है और इसकी मदद से फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। डॉक्टर लिली शेरोन के पैर में मोच फिर भी कोविड मरीजों की चिंताएनेस्थेसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग के जूनियर डॉक्टरों की टीम में शामिल डॉ. लिली शेरोन का जज्बा देखने को बनता है। उनके पैर में मोच के बाद भी वे जल्द ठीक होकर वापस कोविड ड्यूटी करना चाहती हैं। सीढ़ियों से उतरते समय पैर में मोच आ जाने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है लेकिन इसके बाद भी उनका सारा ध्यान कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों की ओर ही लगा रहता है। डॉ. लिली शेरोन कहती हैं, कोरोना काल में मैंने लोगों को सबसे ज्यादा परेशान देखा। यदि हम लोग उनका अच्छे से इलाज करते हैं तो उनके मन में भी जल्दी ठीक होने की ललक जागती है। वे डॉक्टरों की ओर उम्मीद की निगाह से देखते हैं और यही प्रश्न करते हैं कि वे कब ठीक हो जाएंगे। उनकी यही उम्मीद हमें भी हौसला देती है ।