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पंजाब की दो दिन राहुल गांधी की अराजनीतिक यात्रा के भी कई मायने

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नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन तक राजनीति से दूर रहे। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस से कोई भी हवाई अड्डे या अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पवित्र स्थल पर उनसे मिलने नहीं आएगा। वह एक अत्यंत निजी यात्रा में एक भक्त की तरह दो दिन बिताना चाहते थे। पहले दिन राहुल गांधी ने एक आम भक्त की तरह कारसेवा की। सिख परंपरा के मुताबिक कार सेवा का मतलब भक्ति के रूप में या कुछ मामलों में तपस्या के रूप में स्वैच्छिक श्रम करना है। राहुल गांधी को बर्तन धोते और लंगर में खाना परोसते भी देखा गया।
दूसरे दिन राहुल गांधी ने जोड़ा सेवा की, जहां वह जूता काउंटर पर खड़े हुए और स्वर्ण मंदिर में आने वाले भक्तों के जूते रखे और उन्हें सौंपे। इसके अलावा उन्होंने समापन के दौरान पालकी सेवा भी की, जब गुरु ग्रंथ साहिब को ‘सुखासन’ के लिए अकाल तख्त ले जाया जाता है। पंजाब कांग्रेस के किसी भी नेता को राहुल गांधी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। सूत्रों का कहना है कि उनके ऑफिस ने सभी नेताओं को साफ कर दिया कि कोई भी उन्हें लेने या उन्हें छोड़ने के लिए हवाई अड्डे पर नहीं आएगा। राहुल गांधी को केवल उनके निजी सहयोगियों, गुरुद्वारा कर्मियों और सेवादारों के साथ देखा गया।
इसके बावजूद अराजनीतिक कही जा रही यात्रा के समय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदेश स्तर पर कांग्रेस अपने विधायक सुखबीर सिंह खैरा की गिरफ्तारी से नाराज है। हालांकि पार्टी अपनी प्रतिक्रिया में सधी हुई है, लेकिन राज्य स्तर पर उन्होंने भगवंत मान सरकार पर अपना हमला तेज करने की धमकी दी है। इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि राहुल गांधी ने जेल में खैरा से मिलने की कोई कोशिश नहीं की। अगर वह ऐसा करते, तब आप और कांग्रेस के बीच पहले से ही कमजोर संबंधों में और तनाव आ जाता। हालांकि कांग्रेस के अंदर चिंता लोकसभा चुनाव को लेकर भी है। पिछली बार कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटें जीती थीं।
कैप्टन के अब भाजपा में होने के कारण कांग्रेस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि पार्टी एकजुट रहे और जीत हासिल करे। उम्मीद करती है कि राहुल गांधी की सेवा करने वाली तस्वीरें पंजाबियों के दिल को छू जाएगी। स्वर्ण मंदिर का गांधी परिवार से संबंध है। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री काल के तहत ऑपरेशन ब्लूस्टार ने कई सिखों को नाराज कर दिया था और उनकी हत्या भी हुई थी। कांग्रेस ने 1984 के सिख दंगों के लिए आधिकारिक तौर पर माफी मांगी। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह की नियुक्ति भी इन दंगों के बाद सिखों में पैठ बनाने के लिए पार्टी का एक बड़ा कदम था। यह एक ऐसा दाग है जिसे भाजपा कभी कांग्रेस को भूलने नहीं देगी।