Home उत्तरप्रदेश Malegaon Blast Case में हुई थी योगी को फंसाने की साजिश

Malegaon Blast Case में हुई थी योगी को फंसाने की साजिश

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2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत द्वारा सभी सात आरोपियों को बरी किए जाने के एक दिन बाद, एक नया विवाद सामने आया है। इस मामले के एक प्रमुख गवाह मिलिंद जोशी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि जाँच का राजनीतिकरण करने और एक वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी को गिरफ्तार करने के लिए सबूतों को गढ़ने की जानबूझकर कोशिश की गई थी। जोशी ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में यातना दी गई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेताओं को फंसाने के लिए दबाव डाला गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे, जो उस समय केवल संसद सदस्य थे।

जोशी ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए भारी दबाव था। 2008 में वे आज जितने प्रमुख व्यक्ति नहीं थे, फिर भी उन्हें और अन्य लोगों को ‘हिंदू आतंकवाद’ के नाम पर झूठे आरोप लगाने की स्पष्ट कोशिश की गई। मुझे हिरासत में लिया गया और प्रताड़ित किया गया। झूठे सबूत गढ़े जा रहे थे। जोशी ने आगे बताया कि हालाँकि जाँच आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) द्वारा की जा रही थी, लेकिन केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों ने भी पूछताछ में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, “यह अजीब था कि दिल्ली से आए कुछ सीबीआई अधिकारी हमसे पूछताछ कर रहे थे, और वे बेहद आक्रामक थे। मुझे यकीन नहीं है कि उस समय उनका अधिकार क्षेत्र था या नहीं, लेकिन वे निश्चित रूप से शामिल थे और डराने-धमकाने की रणनीति अपना रहे थे।

उन्होंने बताया 2008 में योगी आदित्यनाथ, ये नाम आज जितना बड़ा नहीं था। आज वो एक वैश्विक नाम बन चुके हैं। हालाँकि, 2008 में वो सिर्फ़ एक सांसद थे, और हम पर उनका नाम लेने का काफ़ी दबाव था। इसके लिए हम पर काफ़ी दबाव डाला गया। इस मामले की जाँच दरअसल महाराष्ट्र एटीएस कर रही थी, लेकिन हैरानी की बात ये थी कि दिल्ली से कुछ सीबीआई अधिकारी आए थे, और वो भी पूछताछ कर रहे थे। मुझे नहीं पता कि उस समय ये मामला सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में आता था या नहीं। मुझे कुछ नहीं पता, लेकिन दिल्ली से कुछ सीबीआई अधिकारी आते थे और पूछताछ करते थे, और वो बहुत ही बदतमीज़ी से करते थे। महाराष्ट्र एटीएस के अधिकारी भी दबाव डाल रहे थे। लेकिन दिल्ली के सीबीआई अधिकारी बहुत ही बदतमीज़ी से पेश आते थे और हमें धमकाते थे।

ये खुलासे गुरुवार को अदालत द्वारा पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी करने के फैसले के बाद हुए हैं। अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), शस्त्र अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत सभी आरोप हटा दिए। मालेगाँव विस्फोट 29 सितंबर, 2008 को नासिक जिले के मालेगांव शहर में भिक्कू चौक मस्जिद के पास हुआ था। यह विस्फोट एक मोटरसाइकिल पर बंधे बम से हुआ था, जो रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान और नवरात्रि से कुछ दिन पहले हुआ था। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस इलाके में इस विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।