Home छत्तीसगढ़ जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय ने बचाई मासूम की जान

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय ने बचाई मासूम की जान

46
0
SAVE_20260918_191029
SAVE_20260918_191016
SAVE_20260918_191024
SAVE_20260925_190202
SAVE_20260925_190208

खिलौनों की सुरक्षा पर उठी गंभीर चेतावनी

बीते शनिवार 08 नवम्बर, 2025 की शाम सेल बीएसपी द्वारा संचालित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, भिलाई में एक तीन वर्षीय मासूम की जान बचाने की जद्दोजहद ने सभी का दिल दहला दिया। बच्चे के वोकल कोर्ड (स्वरयंत्र) में खिलौने का एक हिस्सा फंस जाने से अचानक उसकी सांस रुक गई थी। घरवाले घबराए हुए उसे लेकर चिकित्सालय पहुँचे और फिर शुरू हुआ समय के साथ एक जंग, जहाँ हर सेकंड कीमती था।

आपातकालीन विभाग में जांच के बाद पता चला कि बच्चे के श्वसन मार्ग में एक सक्शन कप एरोहेड टिप (जो आमतौर पर तीर-कमान सेट खिलौने का हिस्सा होती है) फंसी हुई थी। यह वस्तु बच्चे की जान के लिए सीधा खतरा बन चुकी थी। बिना देर किये उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती कर स्थिर किया गया और ईएनटी आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया।

वहाँ मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी के मार्गदर्शन में— डॉ. तनुजा और डॉ. अबानी की एनेस्थीसिया टीम ने अत्यंत नाजुक स्थिति में बच्चे के श्वसन नियंत्रण और एनेस्थेटिक प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली। इस बीच डॉ. अश्विन अशोक जैसवाल के नेतृत्व में (ईएनटी सर्जिकल टीम) की डॉ. प्रियंका, डॉ. रौशन और डॉ. गिरिधर के सहयोग से, डॉ. प्राची मेने के पर्यवेक्षण में बाह्य वस्तु (फॉरेन ऑब्जेक्ट) को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। कुछ ही पलों में बच्चे की सांसें सामान्य होने लगीं और माता-पिता की आँखों से राहत के आँसू बह निकले।

इस पूरे प्रकरण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. कौशलेन्द्र ठाकुर और डॉ. उदय कुमार का निरंतर मार्गदर्शन और चिकित्सकीय नेतृत्व अहम रहा। साथ ही ऑपरेशन थियेटर स्टाफ — सुश्री सुषमा, अज्जी, अंशु, संजू सिस्टर, हरी भाई, अंशुल और दिनेश — के साथ पीडियाट्रिक आईसीयू, एफ1 ईएनटी वार्ड और एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम ने अपने उत्कृष्ट समन्वय और तत्परता से इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति को संभाला।

अस्पताल प्रशासन ने टीम की प्रतिबद्धता और सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे में हर सेकंड किसी जीवन के लिए निर्णायक होता है, यह घटना न केवल चिकित्सा दक्षता का उदाहरण है, बल्कि मानवता और समयबद्ध प्रयासों का भी प्रमाण है।

खिलौनों की सुरक्षा पर सीख

यह घटना एक गहरी चेतावनी भी है। छोटे बच्चों के लिए खिलौनों का चयन करते समय अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। छोटे हिस्सों वाले या श्वासनली में फंसने का खतरा पैदा करने वाले खिलौने (जैसे सक्शन टिप्स या प्रोजेक्टाइल्स) पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अत्यंत ख़तरनाक हो सकते हैं। माता-पिता से अपील है कि वे बच्चों के खेलते समय निगरानी रखें, खिलौनों के सुरक्षा लेबल अवश्य पढ़ें और यह सुनिश्चित करें कि खिलौने उम्र और विकास स्तर के अनुसार सुरक्षित हों।

जेएलएन चिकित्सालय का यह सफल उपचार उसकी चिकित्सकीय उत्कृष्टता, टीम भावना और बाल सुरक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया है — जिसने न केवल एक मासूम की जान बचाई, बल्कि अनगिनत घरों को एक अहम सीख दी है।