●मध्यप्रदेश में लागू स्थायीकरण योजना की जबलपुर हाईकोर्ट ने सराहना कि, वर्ष 2016 में 10 वर्ष के न्यूनतम समय सीमा तय कर 48 हजार दैनिक श्रमिको का एवं वर्ष 2023 में न्यूनतम 5 वर्ष समय सीमा तय कर सविंदा कर्मियों का पुनः स्थायीकरण भाजपा के शिवराज सिंह कि सरकार ने किया था। स्थायीकरण योजना लागू करने में कोई कानूनी पेच नही है।
छत्तीसगढ़ में कार्यरत 36 हजार दैनिक मासिक श्रमिको ने मध्यप्रदेश से भी श्रेष्ठ स्थायीकरण योजना माता कौशल्या को समर्पित कर लागू करने की मांग पुनः रखी। निरन्तर 5 वर्षों से दैनिक श्रमिक मोर्चा इस प्रयास में लगा हुआ है। स्थायीकरण के बाद ही आकस्मिकता निधि कार्यभारित के रिक्त पद व तृतीय चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों में सविलियन का मार्ग प्रशस्त होगा।
छत्तीसगढ़ में जब तक 4 नए श्रम कानून लागू नहीं है ऐसे में पुराने श्रम कानून 1948 की धारा 61 व 63 के द्वारा ही यह स्थायीकरण लागू करना संभव है, 4 नए श्रम कानून लागू होते ही पूराने कानून अस्तित्व में नही रहेंगे, स्थायीकरण लागू हो ही नही पाएगा। न्यूनतम समय सीमा 1 वर्ष का सुझाव स्थाईकरण हेतु दी गई है।
ताकि वर्ष बंधन को न्यूनतम करने को कोई भी राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा न बना सके, माता कौशल्या स्थाईकरण के सबंन्ध मे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, विधी विधायी मंत्री, मुख्य सचिव सबंधित समस्त सचिवों को ज्ञापन पत्र दिया गया।
छत्तीसगढ़ में जब भी 4 नए श्रम कानून लागू होंगे, नियुक्ति पत्र, ईपीएफ़, ईएसआईसी, केंद्रीय मासिक वेतन, श्रम सम्मान लाभ समस्त श्रमिको को लागू होगा। इन समस्त व्यय राशि को सँयुक्त रूप से काल्पनिक वेतनमान निश्चित कर स्थाईकरण का नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है इसमें सरकार को कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नही आएगा।






