छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन द्वारा मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 (प्रारूप) के संबंध में श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को विस्तृत सुझाव प्रेषित किए गए हैं। यह सुझाव छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित अधिसूचना के संदर्भ में भेजे गए हैं।
Skip to PDF contentफेडरेशन ने बताया कि राज्य के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी नियमों में आवश्यक संशोधन एवं सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। संगठन ने कहा कि वर्तमान प्रारूप में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनमें संशोधन कर कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है। इस नियम से प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत 5 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित होते है|
Skip to PDF contentगोपाल प्रसाद साहू प्रदेश अध्यक्ष ने बताया की न्यूनतम मूल वेतन कम से कम रु. 30000 निर्धारित करने के परिपेक्ष्य में प्रारूप के नियम 3 मजदूरी की न्युनतम दर की गणना करने के रीति-(1) (घ) आवासीय किराया व्यय जो भोजन और वस्त्र व्यय का 10 प्रतिशत प्रस्तावित किया गया है उसे 30 प्रतिशत करने, (च) बच्चों की शिक्षा का व्यय, चिकित्सा आवश्यकताएं, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक व्यय जो न्यूनतम मजदूरी का 25 प्रतिशत होगा। में संचार सुविधा यथा मोबाइल की भी जोड़ने एवं 25 प्रतिशत में वृद्धि कर 35 प्रतिशत करने, नियम 4 मजदूरी की न्यूनतम दर नियत करने के मापदंड उप नियम (1) (चार) शासकीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को जोड़ने, उप नियम (4) में प्रावधानित तकनिकी समिति में कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित करने, अध्याय-तीन मजदूरी का भुगतान में धारा-16 एवं 17 को सम्मिलित करने सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, श्रम विभाग को सुझाव प्रेषित किया है|
युगल किशोर साहू प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा की न्यूनतम मूल वेतन वर्ष 2017 में पुनरीक्षित किया गया था विभिन्न वर्ग एवं क्षेत्र के अनुसार न्युनतम मूल वेतन 7800 से 10530 था जो अत्यंत कम है|
आशीष तनेजा, राजकुमार साहू, राजकुमार सिंह ने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत के अनुरूप शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान कार्य के लिए समान वेतन और सुविधाएं प्रदान करने सुझाव दिया गया है|
प्रेम प्रकाश गजेन्द्र कार्यकारी अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर मजदूरी नियमों को कर्मचारी हितैषी बनाएगी। संगठन ने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि शासन की कार्यक्षमता में भी सकारात्मक सुधार होगा।






