Home छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारियो की अंतिम उम्मीद माँ कौशल्या स्थायीकरण योजना

अनियमित कर्मचारियो की अंतिम उम्मीद माँ कौशल्या स्थायीकरण योजना

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छत्तीसगढ़ प्रदेश के 51 विभागों में 30 अलग अलग प्रकार के छ: लाखो अनियमित कर्मचारी कार्यरत है, इनमें सभी प्रकार के पूर्णकालिक कर्मचारियो का स्थायीकरण श्रम अधिनियम 1948 के 61 व 63 प्रवाधान से संभव है।

म.प्र. में 2016 व 2023 में 10 व 5 वर्ष वाले पूर्णकालिक दैनिक श्रमिक व सविंदा स्थाईकर्मी इन्ही प्रावधान से बनाये गए है। राजस्थान में भी 5 व 2 वर्ष वाले इसी प्रकार के कर्मचारी स्थायी किये जा चुके है, पंजाब सरकार ने पिछले सप्ताह 3 व 5 वर्ष वाले आउट सोर्सिंग, ठेका, प्लेमसेन्ट कर्मियों को भी ‘पक्का” स्थायी करना आरंभ कर दिया है सभी पूर्णकालिक कर्मचारीयो का स्थायीकरण काल्पनिक वेतन मान से ही संभव है, रिक्त पद, आकस्मिकता निधि कार्यभारित में सीधे स्थायीकरण संभव नही है बल्कि स्थाईकर्मी बनने के पश्चात केवल सविलियन में इन पदों में मर्ज हो सकते है।

पत्र देखने के लिए यह क्लिक करें 

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स्थायीकरण योजना ऊमादेवी प्रकरण 2006, काल्पनिक वेतन मान वित्तीय बोझ मुक्त और विधि अनुकूल समाधान है। म.प्र. उच्च न्यायालय ने स्थायीकरण योजना को बिना नियुक्ति पत्र वाले पूर्णकालिक कर्मियों के लिए सर्वोत्तम समाधान कहा है।
छत्तीसगढ़ में तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी वर्तमान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने चुनाव पूर्व विडीयो जारी कर स्थायीकरण योजना की सराहना कर चुके है, भाजपा सरकार ने अपने 2023 घोषणा पत्र में सभी अनियमित कर्मचारियो से 100 दिन के भीतर कमिटी गठित कर उसमे मात्र सदस्य बनाने का लिखित वादा किया था परंतु आज ढाई वर्ष बाद भी यह अपूर्ण है।
4 नए श्रम सहिता जो जल्द लागू होने वाला है उसके बाद पुराने श्रम कानून अस्तित्व हीन होने के कारण सरकार के पास स्थायीकरण का विकल्प सदैव के लिए समाप्त हो जाएगा।
श्रमिक मोर्चा अनियमित संगठन माता कौशल्या के नाम से 30 प्रकार में से केवल एक प्रकार पूर्णकालिक श्रम दर विभागीय वैतनिक अस्थाई आकस्मिक आवश्यकता अनुसार रखे बिना नियुक्ति पत्र वाले बैक डोर एंट्री के लिए न्यूनतम 1 वर्ष से कार्यरत 51 विभागों के 36 हजार श्रमिको के लिए स्थायीकरण लागू करनें की मांग वर्ष 2021 से निरंतर जो आज भी जारी है सचिवों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री से लिखित रूप में कर रहे है तथा इस सबंन्ध मे मोर्चा के 9 विभागों के 210 कर्मी बिलासपुर उच्च न्यायालय में मुकदमा भी दर्ज कर चुके है।