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छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (सेवा संघ) नियम-2025-26 गैर-जरुरी,अनियमित आन्दोलन को कुचलने,असफल प्रयास कर रहा है सरकार- गोपाल प्रसाद साहू

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राज्य सरकार के छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (सेवा संघ) नियम-2025 के नियम 2 के खण्ड (ख) के स्थान पर (ख) “शासकीय सेवक” से अभिप्रेत है भर्ती नियम के अंतर्गत नियमित स्थापना में नियुक्त कोई भी ऐसा व्यक्ति, जिसको छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 लागू होता हों। खण्ड (ख) के पश्चात्, “(ग) “शासकीय सेवक संघ” से अभिप्रेत है ऐसा संघ, जिसके सदस्य या पदाधिकारी वर्तमान में नियमित शासकीय सेवा में सेवारत हों।” संशोधन गैर-जरुरी एवं संविधान के अनुच्छेद 19 (3) संघ य संगठन बनाने के विपरीत है| यह नियम अनियमित आन्दोलन को कुचलने का प्रयास है|

इस प्रावधान से प्रदेश लाखो अनियमित कर्मचारी जो अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे है सरकार से मान्यता नहीं मिलेगी| पूर्व में भी समय-समय पर अनियमित कर्मचारी संघो ने इस नियम पर विरोध दर्ज कराता रहा है| 

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत लाखो अनियमित कर्मचारियों जैसे-आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह/समिति के माध्यम से नियोजन, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अशंकालिक कर्मचारी नियमितीकरण को लेकर संघर्षरत है| प्रदेश सरकार प्रदेश के शिक्षित युवकों को जो बेरोजगारी का दंश झेल रहा है बंधुआ मजदुर बनाकर रखना चाहता है| मज़बूरी में लाखो लोग अत्यंत कम वेतन में काम करने मजबूर है| इस प्रकार के नियम का हम कड़े शब्दों में निंदा करते है|

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन अनियमित कर्मचारी विरोधी इस नियम को निरस्त करने माननीय मुख्यमंत्री से मांग करता है|