Home छत्तीसगढ़ रायपुर : गोबर से बने उत्पाद बना आजिविका का साधन

रायपुर : गोबर से बने उत्पाद बना आजिविका का साधन

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    रायपुर, 07 नवम्बर 2020

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी अंतर्गत निर्मित गौठानों में ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ के तहत् खरीदी गई गोबर से बनाई गई उत्पाद आजीविका का साधन बन रहे है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के साथ ही अन्य उत्पादन जैसे गोबर के दीए व जैविक कीटनाशक का निर्माण किया जा रहा है। जिला बालोद के महिला स्वसहायता समूहों एवं गौठान समितियों के द्वारा गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट के अलावा, फिनाइल, गोबर के दिये आदि अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही है।

वर्मी कम्पोस्ट एवं वर्मी कल्चर निर्माण हेतु बालोद जिले के गौठान समितियों एवं स्व-सहायता समूहों को सरकारी विभागों द्वारा गोबर, फसल व अन्य जैविक अवशेष एकत्रीकरण, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, वर्मी कल्चर उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट की पैकेजिंग, भण्डारण एवं विक्रय की जानकारी से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विभाग उप संचालक ने बताया कि जिले के 158 गौठानों में 2857 वर्मी बेड स्वीकृत किया गया है, जिसमें से 1805 वर्मी बेड का निर्माण हो चुका है। 1351 वर्मी टांके भरे गये है तथा 955 वर्मी टांका में केचुआ (वर्म) डाला गया है, जिससे 287.10 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसका प्रयोगशाला में गुणवत्ता परीक्षण के पश्चात समितियों के माध्यम से 250 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि रबी के अनाज दलहन, तिलहन, सब्जियों में इसका उपयोग होने लगा है। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। जिससे लोगों को जैविक खाद से उत्पादित अनाज, दाल, तिलहन, फल, सब्जी मिल सकेगा। इससे कृषकों की आमदनी में भी इजाफा होगा।