Home छत्तीसगढ़ स्वस्थ्य रहने के लिए शरीर को जानना और भोजन को पहचाना जरूरी...

स्वस्थ्य रहने के लिए शरीर को जानना और भोजन को पहचाना जरूरी : डॉ. निरंजन वर्मा

70
0
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.48.58 AM (2)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.48.58 AM (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.49.00 AM (1)
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.48.59 AM
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.48.58 AM
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.49.00 AM
WhatsApp Image 2026-08-15 at 7.49.01 AM

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पंचगव्य डॉक्टर असोसिएशन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय तृतीय पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय, रायपुर के सभागृह में आयोजित किया गया।
उक्ताशय की जानकारी प्रदान करते हुए आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य आनन्दकुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य वक्ता गव्यसिद्ध आचार्य एवं गुरू कुलपति पंचगव्य विद्यापीठम् कांचीपुरम् तमिलनाडु डॉ. निरंजन वर्मा द्वारा पंचगव्य चिकित्सा एवं गौ विज्ञान पर विशेष व्याख्यान व मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि गाय की सुरक्षा, सरंचना व संवर्धन के लिए गाय से आर्थिक स्वावलंबी व्यवस्था पर कार्य करने की आवश्यकता है। गाय का महत्व चिकित्सा, कृषि, शिक्षा सहित अन्य सभी क्षेत्रों में है। आज पूरा विश्व विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त है और सभी को चिकित्सा की आवश्यकता है। देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सुविधाओं में खर्च हो रहा है। गाय को स्वास्थ्य से जोड़ दिया जाए तो देश के नागरिक स्वस्थ्य रहेंगे और गाय का भी संरक्षण व संवर्धन होगा। उन्होंने बताया कि पंचगव्य चिकित्सा हमारी वैदिक शास्त्रों में वर्णित एक पुरानी एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। देश में आज 10 हजार से ज्यादा गव्यसिद्ध पंचगव्य चिकित्सा पद्धति से कैंसर, सिकल सेल जैसे जटिल से जटिल बीमारियों का ईलाज कर रहे है और इसके अद्भूत एवं सुखद परिणाम भी मिल रहा है। उन्होंने पंचगव्य चिकित्सा से स्वस्थ हुए विभिन्न मरीजों के उदाहरण प्रस्तुत किए।
डॉ. निरंजन वर्मा ने कहा कि स्वस्थ्य रहने के लिए शरीर को जानने और भोजन को पहचानने की आवश्यकता है। दुनिया में सबसे सरल विज्ञान चिकित्सा शास्त्र है। महर्षि वाग्भट्ट ने घर को स्वस्थ्य रखने के लिए तीन सूत्र दिए हैं। जिसमें घर के बाहर गाय, आंगन में तुलसी और घर के एक कोने में दुनिया का सबसे बेहतर चिकित्सालय रसोई तीन सुरक्षा चक्र है। जब तक भारत के घरों में तीनों सुरक्षा चक्र थे, भारत दुनिया का सबसे स्वस्थ देश था, लेकिन आज लगभग पूरा देश बीमार है और आज फिर से तीनों सुरक्षा चक्र को स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पायी जाने वाली गऊवंश की विशेषता और उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय गऊवंश के सिंगों पर किए गए शोध के विषय में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. वर्मा ने कहा कि गाय और गाय से प्राप्त गव्य चन्द्रमा की तरह सरल, सुंदर और शीतल है तथा सूर्य में मिलने वाले सभी गुण गाय में होते है। उन्होंने गाय में पायी जाने वाली सूर्य केतु नाड़ी के कार्य, महत्व एवं उपयोगिता की विस्तार से जानकारी दी। गाय के गोबर से पानी, घी से पर्यावरण के शुद्धिकरण के प्रयोग के बारे में बताया। उन्होंने आकड़ों के माध्यम से बताया कि जहां गाय की संख्या अधिक है, वहां चेतना का विकास होता है और अपराधों की संख्या कम है। पंचमहाभूतों का संतुलन बिगड़ने से बीमारियां होती है और इसका संतुलन पंचगव्य से संभव है। उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नियमित भस्म के पानी का सेवन करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि पंचगव्य के सेवन से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। साथ ही रसायनिक दवाईयों के दुष्प्रभाव को दूर करने में पंचगव्य कारगर है। हमारे पूर्वजों ने गाय के विज्ञान को समझकर ही गाय को माँ कहा।
इस दौरान उपस्थित श्रोताओं के जिज्ञासाओं का समाधान गुरूजी द्वारा किया गया। बढ़ते कैंसर और हृदयघात से मौतों पर उठे सवाल पर निरंजन वर्मा ने कहा कि कोरोना के लिए बनी वेक्सीन के साइडइफेक्ट हुए हैं, कैंसर और हार्ट फेलियर के साथ ही 70 प्रतिशत महिलाओं में मासिक अनियमितता की शिकायत देखी जा रही है, महिलाओं में बांझपन और पुरुषों में नपुंसकता बढ़ रही है।
पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने को संबोधित में कहा कि पंचगव्य चिकित्सा हमारे पुरातन चिकित्सा पद्धति का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने भारत में पायी जाने वाली गऊवंश की विशेषता के संबंध में जानकारी दी। श्री साहू ने राज्य में बहुतायत की संख्या में पायी जाने वाली कोशली गऊवंश के बारे में विस्तार से बताया। प्रदेश प्रवक्ता भाजपा गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर गुरूजी का आममन और पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन आयोजन किया जा रहा है, जिसका लाभ निश्चित ही राज्य के नागरिकों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारा शरीर पंचतत्व से निर्मित है और हमें पंचगव्य के महत्व को जानने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के संरक्षक राधेश्याम गुप्ता, एसपी साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम स्थल पर निःशुल्क नाड़ी परीक्षण एवं पंचगव्य चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन हुआ। इस अवसर पर निर्वासित तिब्बती सांसद वेन. गेशे नगावा गांगरी एवं सुश्री तेनजिन चो, जिन, किसान नेता कृपाराम साहू, श्रीमती अंजू सिंह, सुशांत विश्वास, मुकेश पिल्ले, नरेन्द्र गुप्ता, आनन्दकुमार श्रीवास्तव एवं छत्तीसगढ़ पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन के गव्यसिद्ध डॉ. प्रमोद कश्यप, गव्यसिद्ध डॉ. मुकेश स्वर्णकार, गव्यसि डॉ. अवधेश कुमार, गव्यसिद्ध डॉ. धीरेन्द्र यादव, गव्यसिद्ध डॉ. कमलेश ढीवर, गव्यसिद्ध डॉ. डिलेश्वर साहू, गव्यसिद्ध डॉ. कामेश्वर प्रसाद, गव्यसिद्ध डॉ. पुरूषोत्तम सिंह राजपूत, गव्यसिद्ध डॉ. कृपा पटेल, गव्यसिद्ध डॉ. कुशवाह, भाविन जी, संजय सिंह, वेदप्रकाश शर्मा बरेली-उत्तर प्रदेश सहित अन्य गव्यसिद्ध डॉक्टर्स तथा विद्यार्थी, गौ पालक, जैविक कृषक एवं राजधानी के अलग-अलग क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों सहित राजनांदगाव से मां पंचगव्य चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र के सभी सदस्यगण उपस्थित थे।