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इंग्लिश स्कूलों के बच्चे अच्छे चरित्र और व्यवहार के साथ बोलने और पढ़ने में करें बेहतरीन प्रदर्शन: स्कूल शिक्षा मंत्री

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स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्राचार्यो का दस दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ 


    रायपुर, 08 फरवरी 2021

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम आज प्रशासन अकादमी निमोरा रायपुर में आयोजित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्राचार्यो के 10 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रशिक्षण मंे उपस्थित अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के प्राचार्यो से कहा कि पढ़ाई में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही स्कूलों के संचालन में मेनेजमेंट के आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करना आना चाहिए। बच्चों को अंग्रेजी सीखाने के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक और बच्चे इंग्लिश में बात करें। सबसे महत्वपूर्ण बात जो प्राचार्यो को ध्यान में रखनी है वो यह है कि स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चे अच्छे चरित्र और व्यवहार के साथ-साथ बोलने और पढ़ने में बेहतरीन प्रदर्शन कर सके। विभिन्न विषयों में भी उनकी समझ विकसित हो, विज्ञान में वे स्वयं विभिन्न प्रयोगों को करके देखे और अपनी समझ बनाए। मंत्री डॉ. टेकाम ने हिन्दी और अंग्रेजी में दिए उद्बोधन में मुख्य प्रशिक्षक की भाती नजर आए।
    मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुसार 52 इंग्लिश स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इन स्कूलों को आकर्षक बनाने के लिए परम्परागत भवन के स्वरूप के बदले इन्हें नये स्वरूप में विकसित करने के उद्देश्य से आर्किटेक्ट की सेवाओं का उपयोग किया गया है। सभी अंग्रेजी माध्यम स्कूल एक नये लुक में सामने आए हैं। इनमें प्रवेश के लिए पालकों में बहुत ही प्रतिस्पर्धा है। प्राचार्यो को इन स्कूलों के स्तर को बनाए रखना है। दस दिवसीय प्रशिक्षण में मुख्यतः लीडरशीप, स्कूल क्वालिटी, कार्यालयीन प्रक्रिया, विजन मिशन, शैक्षणिक कैलेण्डर, आपरेटिंग प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्राचार्य प्रशिक्षण में बताई गई बातों को ध्यान से समझकर अपने स्कूलों में उपयोग में लाएं। स्कूल खुलने पर स्कूल का पूरा-पूरा प्रभाव आसपास के समुदाय को दिखे। 
    प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि सभी प्राचार्यो को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अध्ययन करना है। बच्चों का आत्म विश्वास बढ़ाने और अंग्रेजी में बात करने के लिए नवाचारी गतिविधि की आदत डालनी होगी। दस दिन के प्रशिक्षण में डाक्यूमेंट तैयार करना और स्कूल कैलेण्डर बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रारंभ हुए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिन्दी माध्यम के बच्चे भी पढ़ने आएंगे। ऐसे बच्चों को पूरा सहयोग मिलना चाहिए। इन बच्चों की क्षमता को बढ़ाना विद्यालय के प्राचार्यो की जिम्मेदारी है। विद्यालय में अंग्रेजी का वातावरण निर्मित हो। विद्यालय में स्थापित की गई प्रयोगशाला, पुस्तकालय का भी उपयोग बच्चों की शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाने में किया जाए। बच्चों के यूनिट टेस्ट, मासिक, तिमाही, छह माही परीक्षा भी हो, जिससे बच्चे बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सके। शिक्षक स्वयं अपना मूल्यांकन करें। पढ़ाई के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक गतिविधियां होनी चाहिए। बच्चों को अंग्रेजी सुनने और बोलने का अभ्यास कराना होगा। 
    राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक श्री डी. राहुल वैंकट ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस अवसर पर सुश्री मीताक्षरा, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अतिरिक्त संचालक श्री योगेश शिवहरे, प्रशिक्षक प्रियंका त्रिपाठी, सौम्या रघुवीर, श्री सत्यराज अय्यर, डी. दर्शन सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी उपस्थित थे।