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शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थाओं में आंतरिक परिवाद समिति का गठन अनिवार्य : महिला एवं बाल विकास कार्यालयों में लगाएं शिकायत पेटी

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने विडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से
महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को दिए निर्देश

रायपुर, 25 फरवरी 2021

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने सभी शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थाओं में आंतरिक परिवाद समिति एवं स्थानीय परिवाद समिति का अनिवार्य रूप से गठन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न के मामले को रोका जा सके। उन्होंने कहा है कि संबंधित कार्यालयों में समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों का नाम और मोबाइल नंबर आवश्यक रूप से डिस्प्ले करें। औचक निरीक्षण के दौरान यदि किसी विभाग में समिति का गठन करना नहीं पाया गया तब संबंधित अधिकारी के ऊपर 50 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। डॉ. किरणमयी नायक ने यह दिशा-निर्देश 24 फरवरी को कलेक्टोरेट परिसर रायपुर के लोक सेवा केन्द्र में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, नवा विहान के जिला संरक्षण अधिकारियों एवं सखी वन स्टॉप सेंटर के केन्द्र प्रशासकों तथा कांउसलरों को विडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से ली जा रही बैठक में दिए।

डॉ. नायक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामले जिनमें कोर्ट से आदेश पारित हो गया है और आदेश का अनुपालन नहीं हुआ हो उन सभी प्रकरणों को प्रताड़ित महिला के आवेदन के माध्यम से राज्य महिला आयोग को प्रेषित करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवमानना के ऐसे प्रकरणों पर संबंधित जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से मिलकर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। डॉ. नायक ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी के लिए संरक्षण अधिकारियों, एम.एस.डब्ल्यू और पैरालीगल सलाहकारों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण का जल्द ही रायपुर में आयोजित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि एक सप्ताह के भीतर महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के सामने एक शिकायत पेटी लगवाएं और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि स्थानीय महिलाओं को इसकी जानकारी हो सके।

डॉ. नायक ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने, उनके हितों की देखभाल व संरक्षण करने, महिलाओं के प्रति भेदभाव व्यवस्था को समाप्त करने, हर क्षेत्र में उन्हें विकास के सामान अवसर दिलाने एवं महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों, अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए राज्य महिला आयोेग निरंतर कार्यरत है। महिलाओं से जुड़े संवेदनश्ीाल मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्परता से कार्य करने की आवश्यकता है। श्रीमती नायक ने महिलाओं को न्याय के समान अवसर दिलाने के लिए जिला अधिकारियों से महिला आयेाग को सक्रिय महिला वकीलो का नाम एक सप्ताह के भीतर प्रस्तावित करने कहा।