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समान नागरिक संहिता कानून डॉ. अम्बेडकर रचित संविधान के विरूद्ध है : कांग्रेस

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राजनांदगांव। प्रदेश कांग्रेस सचिव आफताब आलम ने कहा कि देश की ज्वलंत समस्या महंगाई व बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों से देशवासियों को भटकाने के लिए समान नागरिक संहिता कानून को षड्यंत्रपूर्वक लाया जा रहा है। ज्ञात हो कि भारतवर्ष में विभिन्न धर्मों एवं सम्प्रदाय से जुड़े लोग रहते हैं। इन सम्प्रदाय के नियम-कायदे और सामाजिक मान्यताएं व रीति-रिवाजों को रोक पाना संभव नहीं है। ऐसे में पिछले 9 वर्षों से लगातार अजा-अजजा व अल्पसंख्यक समुदाय को भाजपा द्वारा किसी न किसी रूप से प्रताड़ित कर उन्हें देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का कुत्सित प्रयास कर रही है। सालों के लंबे संघर्ष और त्याग के बाद दलित, आदिवासी, पिछड़ो और अल्पसंख्यक को डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा कठिन संघर्ष और जीवनमरण के बाद संवैधानिक रूप से देश में समानता का अधिकार दिलाया तथा अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पूर्ण करने का अधिकार दिलाया। भाजपा समान नागरिक संहिता के बहाने आदिवासी प्रथागत कानूनों, कास्तकारी और संथाल परगना कास्तकारी अधिनियम, विल्किंसन नियम, पेसा कानून, 5वीं अनुसूची क्षेत्र के नियमों, आदिवासियों के विवाह और तलाक कानूनों को खत्म करने की साजिश कर रही है।
श्री आलम ने कहा कि भाजपा पूर्ण रूप से आरक्षण विरोधी है। इसका सबसे पुख्ता उदाहरण यह है कि बेइंतहा निजीकरण बढ़ावा देना है। ज्ञात हो कि आरक्षण समाप्त करने के इरादे से सरकारी उपक्रमों का विलय निजी क्षेत्रों में कर रही है। गौरतलब है कि निजी क्षेत्रों पर आरक्षण की बाध्यता नहीं होती है। ऐसे में आरक्षण का मसला की खत्म हो जाएगा। इससे आरक्षित वर्गो की स्थिति पूर्व की तरह हो जाएगी, जहां तक धारा 370 हटाने का भाजपा श्रेय ले रही है। अभी तक उसकी सुनवाई कोर्ट में प्रांरभ नहीं हुई है तथा संसद में तीन तलाक कानून पास होने का श्रेय भाजपा लेने का प्रयास कर रही है। उल्लेखनीय है कि संसद में कानून पास होने से तीन माह पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया था।