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महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों के लिए कुपोषण पर ऑनलाइन संवेदीकरण तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित

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प्रदेश के 1100 अधिकारियों ने समझा बच्चों में कुपोषण के तकनीकी पहलुओं को

    रायपुर, 22 जनवरी 2021

 प्रदेश में कुपोषण स्तर को न्यूनतम स्तर में लाने के उद्देश्य से  महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में काम कर रहे अधिकारियों के लिए संभाग स्तरीय ऑनलाइन संवेदीकरण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में अधिकारियों और कर्मचारियों को कुपोषण के कारणों और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में 20 जनवरी को रायपुर, दुर्ग संभाग और 22 जनवरी को बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर संभाग के अधिकारियों को केयर इंडिया के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रीधर द्वारा कुपोषण के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दोनों सत्रों में विभाग के कुल 1100 जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षकों को कुपोषण की पहचान, उसके कारण और उसे दूर करने के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। 

     उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (एन.एफ.एच.एस-4) के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुपोषण का स्तर 37.7 और वजन त्यौहार के अनुसार 23.37 है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कुपोषण मुक्ति की पहल करते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री श्री बघेल और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया के निर्देशन में लगातार मैदानी अमले को कुपोषण से संबंधित जानकारियां देकर अपग्रेड किया जा रहा है। 

    प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बौनापन, दुबलापन व कमभारिता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इनके पहचान के तरीके को विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थियों के कुपोषण के संबंध में शंका समाधान भी किया गया। डॉ. श्रीधर ने बताया कि बौनापन और दुबलापन दूर करने के लिए 6 माह से 9 माह तक के बच्चों को पूर्ण पूरक पोषण आहार दिया जाना चाहिए। बच्चे के भूखे होने और बीमार होने की स्थिति को अच्छी तरह समझकर उसके अनुसार निर्णय लिया जाना चाहिए, जरूरत पड़ने पर पोषण पुनर्वास केन्द्र की मदद लेनी चाहिए। डॉ. श्रीधर ने अनुवांशिक बौनेपन को कम करने के सवाल पर बताया कि अनुवांशिक बौनापन कम नहीं होता लेकिन सही देखभाल और खानपान से उसमें 30 प्रतिशत तक सुधार लाया जा सकता है। प्रशिक्षण में संचालनालय, राज्यस्तरीय संसाधन केन्द्र, क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान के अधिकारी भी उपस्थित थे।