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जब नारी मुस्कुराती है, तब धरती भी मुस्कुराती है : महिला पढ़ही विकास गढ़ही विषय पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी

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    रायपुर 8 मार्च 2021

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला पढ़ही, विकास गढ़ही विषय पर राज्य स्तरीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉं. मनीषा वत्स ने कहा कि महिला पढ़ही, विकास गढ़ही केवल शब्द ही नही, सच्चाई भी है। उन्होंने कहा कि पहले भी महिला सशक्त थी, आज भी सशक्त है और आगे भी महिला सशक्त रहेगी। महिला पायलट भी है, अंतरिक्ष तक पहॅंुच गई है। आज वह घर व बाहर दोनों ही जगहों पर बहुमूल्य योगदान दे रही है। महिलाओं में शिक्षा से ही सोचने, समझने का नजरिया बदलता है, जो स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन व समाज को एक नई दिशा व उजाले की ओर परिवर्तित कर देता है। उन्होंने आगे महिला के विभिन्न पहलुओं को एक कविता के माध्यम से पिरोया मेरा छोटा सा सपना, मैने देखा है एक, एक छोटा सा सपना क्या पूरा होगा, मॉं का रिश्ता न हो पराया…… जब नारी मुस्कुराती है तब धरती भी मुस्कुराती है।
    विशेष वक्ता डॉ मीनाक्षी बाजपेयी ने कहा कि शिक्षा ही महिला को समाज में सकारात्मक दर्जा दिया है। महिला उत्साह और लगन के साथ सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती है, जो सामाजिक परिवर्तन का ही परिणाम है। सहायक प्राध्यापक प्रो. धारा यादव ने कार्यक्रम को मॉं को समर्पित करते हुए कविता के माध्यम से अपनी बात रखी। कविता के बोल में महिला को उद्धृत करते हुए कहा कि – सूखे से तेरे होठ है, जिसने कितने बाते समेटे है बालो को तुने सराहा नही फिर भी तु कमाल लगती है…। सूखे होंठो पर मीठी सी मुस्कान तेरे होठों की जान है।
    प्राधिकरण के सहायक संचालक श्री प्रशांत कुमार पाण्डेय ने पद्मश्री फूलबासन बाई, तीजन बाई, रितु वर्मा से लेकर अमेरिका की कमला हेरिस तक का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में अब महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। समाज में अभी भी महिलाओं के प्रति सम्मान में ज्यादा संवेदनशीलता की आवश्यकता है। सहायक संचालक श्री दिनेश टांक ने गजल की प्रस्तुति की।
    इसी अवसर पर सुश्री नेहा शुक्ला ने महिला को महिला की दोस्त व सखा होने की बात कही। श्रीमती कृष्णा गौर ने धरा में धरणी हूं मैं ही पालनहार, सृष्टि की रचना है मुझमें, मै ही शक्ति का अवतार कविता के माध्यम से महिला की उपयोगिता को स्पष्ट किया। श्रीमती कविता लिखार ने भी कविता के माध्यम से अपनी बात को बताया उन्होंने कहा मै अम्बर मै सितारा हूॅ, मै हवा मै फिजा हूॅ, मै ही जन्नत का नजारा हूॅ।
    कार्यक्रम का संचालन श्रीमती निधि अग्रवाल, सुश्री नेहा शुक्ला, कृष्णा गौर, कविता लिखार व सुनील रॉय ने भी इस मौके पर रोचकतापूर्ण तरीके से महिला दिवस पर अपने उद्गार व्यक्त किए।